भगवान बनाने वाले, क्या तेरे मन में समाई? काहे को भगवान बनाया?
अगर मैं आज यहाँ नही होता, तो मेरी जगह पे वह बैठा रहता । तुम लोग यह बात समझ नही पाओगे । वो मेरा दोस्त ही नही, मेरा सबसे बड़ा प्रतिद्वन्द्वी भी था ।
आज किसी को भगवान बना ने में तुम लोग देर नही करते । सरल-सादे मनुष्य को सुविधाजनक भगवान बना देते हो । तुम भूल जाते हो के वह आखिर एक सादा मनुष्य है, पर वह स्वयं कैसे भूले अपने आप को? वह तो मनुष्य जैसा व्यवहार करता है । तब, तुम्हारी दृष्टि में वह गिर जाता है । पर किसी मिट्टी के देवता की तरह, तुम उसका विसर्जन भी नही कर सकते । तुम्हें ऐसा भगवान चाहिये जिसे तुम कोस सकते हो, गाली दे सकते हो । उसे धरती पर पटक सकते हो, आकाश में स्थापित कर सकते हो । तुम्हें नियंत्रण की सुविधा चाहिये, भगवान नही । जब चाहा बना दिया, जब चाहा गिरा दिया । मूर्ति भी तुम्हारी, मूर्तितल भी तुम्हारा । कटघरे में खड़ा बेचारा भला आदमी ।
मैं नही तो आज वह तुम्हारा भगवान रहता । पता नही, भगवान बनाने वाले, क्या तेरे मन में समाई?


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