धर्म का अधिकार
मंदिर के सामने उनका दफ्तर
रस्ते के इस पार मंदिर और उस पार उनका दफ्तर
वे जो बन बैठे है हमारे धर्म के प्रतिनिधि
माहोल बना बैठे है, शोर असीमित.
शाम की आरती सुनाई नहीं देती,
इन धर्मादिकारियों के शराबी शोर में
भगवान तो बुत ही था, अब भक्त भी बुत बन बैठे
अब राजनीती तय करेगा हमारा धर्म, हमारा अधिकार.
उस आग में क्या खोया?
किसी एक की मौत किसी दुसरे की ज़िन्दगी बदल देती है,
एक जिंदा लाश उस मौत का मतलब समझने में,
आस-पास के जिंदा लोगों से कई निःशब्द सवाल पूछते हुए
तलाश करती है कोई आरोपी.
उठाकर मेरी उंगली, उसे तुम्हारे चेहरे के सामने रखूं
न तो मरनेवाला लौट आएगा, न मेरे आँसू थमेन्गे
न मतलब कोई सामने आएगा, न जी पाउंगी मैं
पर अकेले जिंदा रहने का मक्सद मिल जायेगा.
शनिचर को हमने सुझॅन बियर द्वारा दिग्दर्शीत चित्रपट “द थिंग्स वी लॉस्ट इन द फायर (२००७)” देखा.
आपकी अनुपस्थिति
ग्यारह महीने आप दूर रहे,
क्या खोज लिया आपने अपना अस्तित्व?
आप का तो पता नहीं,
आपकी खोज में हमारी पहचान खो गयी।
आप साल भर में घूम आए सारी दुनिया,
देख आए नए रंग और नए चहरे?
आपकी बेपरवा अनुपस्थिति में,
हमारा रंग और फीका पड़ गया।
भगवान बनाने वाले
भगवान बनाने वाले, क्या तेरे मन में समाई? काहे को भगवान बनाया?
अगर मैं आज यहाँ नही होता, तो मेरी जगह पे वह बैठा रहता । तुम लोग यह बात समझ नही पाओगे । वो मेरा दोस्त ही नही, मेरा सबसे बड़ा प्रतिद्वन्द्वी भी था ।
आज किसी को भगवान बना ने में तुम लोग देर नही करते । सरल-सादे मनुष्य को सुविधाजनक भगवान बना देते हो । तुम भूल जाते हो के वह आखिर एक सादा मनुष्य है, पर वह स्वयं कैसे भूले अपने आप को? वह तो मनुष्य जैसा व्यवहार करता है । तब, तुम्हारी दृष्टि में वह गिर जाता है । पर किसी मिट्टी के देवता की तरह, तुम उसका विसर्जन भी नही कर सकते । तुम्हें ऐसा भगवान चाहिये जिसे तुम कोस सकते हो, गाली दे सकते हो । उसे धरती पर पटक सकते हो, आकाश में स्थापित कर सकते हो । तुम्हें नियंत्रण की सुविधा चाहिये, भगवान नही । जब चाहा बना दिया, जब चाहा गिरा दिया । मूर्ति भी तुम्हारी, मूर्तितल भी तुम्हारा । कटघरे में खड़ा बेचारा भला आदमी ।
मैं नही तो आज वह तुम्हारा भगवान रहता । पता नही, भगवान बनाने वाले, क्या तेरे मन में समाई?
वो शहर…
वो शहर की भीड़ में अपना रास्ता ढूंढना
वो ठेले पर सस्ते में जल्दी से नाश्ता करना
वो वक्त को बचाने के लिए लोकल से लटकना
वो पसीने से लथपथ धूप मे सुख रही कमीज़
वो दर्द भरे बदन की आँखों मे कल के सपने
वो फिसलते हुए लमहें, उन्हे बटोरने का प्रयास
वो घर से दूर रहना
वो घर की याद को भुलाने की कोशिश
वो नहीं अाते, उनकी याद अाती है
वो कुछ लोग है, कुछ यादें है
वो कुछ लमहें है, कुछ साल है।
इस दिन, हर साल यहीं
हमारी अकेले में बातचीत है।
चलो इक बार फीर से…
चलो प्रणय के बंधन में हमारी किस्मत का विवाह कर लें। कुछ रंग फीका है, पर एक नाक्शा है मेरे हाथों में। शायद कुछ रास्ते याद आ जाएं, जो हम भूल गये हैं।
किसी कविता से प्रेरित हो, मैं तुम से प्यार करूँ, तुम भी इन रास्तों पर चल कर कुछ याद करो। मैं कविता तो लिख नही पाता, इस गद्य से काम चला लो, अलंकार साथ देते नही, तुम ही दे दो।
शब्द बने मेरे दुश्मन, तुम तो साथ दे दो?
परीक्षा
अगर मैं कहूँ कि मैं पिछले चार महीने हिन्दी मे लिखने के तरीके ढूंढ रहा था, तो क्या आप मेरा विश्वास करेंगे? शायद नही। पर यह सच है। मॉक द्वारा कुछ परीक्षण और निरीक्षण। कुछ खोज।
मॅक में पहला चिठ्ठा
मॅक में लिखा गया पहला चिठ्ठा। कया अाप इसे ठिक से पढ पा रहें हैं?
MacShift
I recently shifted to a Mac. Would you know of a Hindi/Marathi transliteration software for the Mac? My search is on, if you can help, I’d be grateful. In the meanwhile, posting may be slow(er).
Thank you!