एक नई शुरुआत
बहुत दिन हुए, हिन्दी में लिखे हुए। शायद यहाँ, वर्डप्रेस पर और लिखा जायेगा। नई शुरुआत करने के कारण कई होते है, कारण ना होने का भी कभी कारण होता है?
७ सितम्बर २००५ को हिन्दी में पहला चिट्ठा लिखा था, आज, कुछ एक साल बाद, यहाँ एक नई शुरुआत । पिछले कुछ महीनों से ‘ठेले पे हिमालय‘ पर मित्रों का आना भी बंद हुआ है – मेरे लिये शायद एक चिन्ह है – बर्फ पिघल रहा है ।
Beautiful! Kaaran na hone ke bhi kaaran hote hain: liked that bit.
Bishwanath Ghosh
February 6, 2007 at 8:34 am
==Bish: For some reason – completely missed out your comment. And thank you
gaizabonts
March 31, 2007 at 5:12 pm