ठेले पे हिमालय

भाषा मे अस्तित्व की खोज

चेहरे

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पिछले सप्ताह हम लंडन आर्ट फ़ेर गये थे । अनेक कलाकार वहाँ अपने काम का प्रदर्शन कर रहे थे । वैसे तो शायद मैं वहाँ जाता नही, पर पिछले दिन समाचार पत्र में पढा के फ़िलिप लोर्का-दिकोर्सिया के कुछ चित्र भी थे । उनके काम का मैं प्रशंसक हूँ ।

दुर्भाग्य से उनके केवल तीन चित्र ही थे । इसके बावजूद, उनकी कला को आमने-सामने देखना, अपने-आप में एक अलग अनुभव था। अगर आप उनका काम देखना चाहते है, तो गुगल के ईमेज सर्च में philip lorca dicorcia head खोजें । इस कलाकार के बारे में यहां पढें

Written by Gaizabonts

January 27, 2007 at 2:38 pm

2 Responses

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  1. दुर्लभ चित्रों को सामने से देखने का मजा सच में अनोखा होता है…जब आपके ब्लाग पर ही अत्यंत सुंदर लग रहा है तो…!!!इसे हम सब को दिखाने के लिए शुक्रिया॥

    Divyabh

    January 28, 2007 at 10:23 am

  2. ==Divyabh: ठेले पे हिमालय पे आपका स्वागत है ! हाँ, कला जितनी दुर्लभ होती है, उतना ही उसे देखने में मजा आता है। शायद यही कारण है, दुर्लभ कला का भाव इतना बढता रहता है।

    gaizabonts

    January 28, 2007 at 1:53 pm


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