पिछले सप्ताह हम लंडन आर्ट फ़ेर गये थे । अनेक कलाकार वहाँ अपने काम का प्रदर्शन कर रहे थे । वैसे तो शायद मैं वहाँ जाता नही, पर पिछले दिन समाचार पत्र में पढा के फ़िलिप लोर्का-दिकोर्सिया के कुछ चित्र भी थे । उनके काम का मैं प्रशंसक हूँ ।
दुर्भाग्य से उनके केवल तीन चित्र ही थे । इसके बावजूद, उनकी कला को आमने-सामने देखना, अपने-आप में एक अलग अनुभव था। अगर आप उनका काम देखना चाहते है, तो गुगल के ईमेज सर्च में philip lorca dicorcia head खोजें । इस कलाकार के बारे में यहां पढें ।
दुर्लभ चित्रों को सामने से देखने का मजा सच में अनोखा होता है…जब आपके ब्लाग पर ही अत्यंत सुंदर लग रहा है तो…!!!इसे हम सब को दिखाने के लिए शुक्रिया॥
==Divyabh: ठेले पे हिमालय पे आपका स्वागत है ! हाँ, कला जितनी दुर्लभ होती है, उतना ही उसे देखने में मजा आता है। शायद यही कारण है, दुर्लभ कला का भाव इतना बढता रहता है।