ठेले पे हिमालय

भाषा मे अस्तित्व की खोज

चलो इक बार फीर से…

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चलो प्रणय के बंधन में हमारी किस्मत का विवाह कर लें। कुछ रंग फीका है, पर एक नाक्शा है मेरे हाथों में। शायद कुछ रास्ते याद आ जाएं, जो हम भूल गये हैं।

किसी कविता से प्रेरित हो, मैं तुम से प्यार करूँ, तुम भी इन रास्तों पर चल कर कुछ याद करो। मैं कविता तो लिख नही पाता, इस गद्य से काम चला लो, अलंकार साथ देते नही, तुम ही दे दो।

शब्द बने मेरे दुश्मन, तुम तो साथ दे दो?

Written by Gaizabonts

November 25, 2007 at 12:18 am

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