भीतर: अंतिम सीमा

कोई जगह नही बची।

अपनी बाहों या पैरों को फ़ैलाने के लिए – निचे लेटकर नीले आकाश की ओर देखने के लिए। ज़ोर से हसने के लिए।

कोई जगह नही बची।

एक सुन्दर एहसास को सौ बार महसूस करने के लिए। जहाँ गूँजों की प्रतिध्वनि बीते क्षणों को लौटाए।

कोई जगह नही बची।

जहां सभी छोर से रहित एक जगह में खुशी का नृत्य इकट्ठा नाच सकते हैं। जहां लय हमें दूर, किसी अपरिचित दुनिया, में ले जा सके। केवल एक ऐसी जगह बची है – अगर आप उसे जगह कह सकते है – हमारे दिल में है। एक अनंत अंतरिक्ष। जहां हम, हम हो सकते है।

और ऐसे स्थान करोड़ों- अरबों में है, लेकिन शायद ही कभी एक दूसरे को मिलते हैं।

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