चलो इक बार फीर से…

चलो प्रणय के बंधन में हमारी किस्मत का विवाह कर लें। कुछ रंग फीका है, पर एक नाक्शा है मेरे हाथों में। शायद कुछ रास्ते याद आ जाएं, जो हम भूल गये हैं। किसी कविता से प्रेरित हो, मैं तुम से प्यार करूँ, तुम भी इन रास्तों पर चल कर कुछ याद करो। मैं कविता … पढ़ना जारी रखें चलो इक बार फीर से…

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नहीं, आप नहीं

नहीं, नहीं, आप नहीं मैं ही कुछ बदल सा गया हूँ। जिस राह पर हम साथ चल रहे थे उस राह से थोडा भटक गया हूँ, आप सब को अब भी साथ देखता कर जाहिर है, मैं ही बहक गया हूँ। नहीं, नहीं, आप नहीं मैं ही कुछ बदल सा गया हूँ। कुछ सपने हम … पढ़ना जारी रखें नहीं, आप नहीं

क्रोध

तुम्हारे नाम, न जाने कितने शब्द कटें, मरें। हर इच्छा का अंतिम संस्कार कर आया हूँ, हर खुशी को अग्नि दे आया हूँ। तुम्हारे जाने का समय आ गया है।

दस गुना और

  वहाँ ३॰॰ हो चुके - यहाँ बस इकतीस। अब तक तो सेन्चुरी भी नही हुई यहाँ, बात कर रहे हैं तीन सौ की।