प्रति व्यर्थ

जिसे हम व्यर्थ कहते है, वह हमारी एक-विमीय सोच का नातीजा है। कोइ दुसरा तरिका तो होगा? हमारी कल्पना की सीमा का अंत जहां होता है, वहीं पर हर निरर्थक बात शुरु होती है। जब हम संकल्प का आभाव अनुभव करते हैं, हम उसे, व्यर्थ कहते हैं। संकल्प सुनिश्चित होते हैं; पर हमारी इच्छा व्यक्तिपरक और सीमीत होती है। हमें इस घेरे से बाहर निकलना … पढ़ना जारी रखें प्रति व्यर्थ

मेरे शब्द और मैं

"आप इतनी अच्छी हिंदी बोल लेते हो?" बम्बई में रह कर, आपकी पूरी दुनिया सुधर सकती है. आपकी भाषा, मगर, भ्रष्ट हो जाएगी, शायद नष्ट भी हो जाएगी. पता नही कहाँ, पता नहीं क्यूँ, बम्बई के बाहर, मैं अच्छी हिंदी बोल लेता हूँ. आयेला, गयेला, लागेला - इन शब्दों का प्रयोग बम्बई के बाहर नहीं … पढ़ना जारी रखें मेरे शब्द और मैं

धर्म का अधिकार

मंदिर के सामने उनका दफ्तर रस्ते के इस पार मंदिर और उस पार उनका दफ्तर वे जो बन बैठे है हमारे धर्म के प्रतिनिधि माहोल बना बैठे है, शोर असीमित. शाम की आरती सुनाई नहीं देती, इन धर्माधिकारियों के शराबी शोर में भगवान तो बुत ही था, अब भक्त भी बुत बन बैठे अब राजनीती … पढ़ना जारी रखें धर्म का अधिकार

उस आग में क्या खोया?

किसी एक की मौत किसी दुसरे की ज़िन्दगी बदल देती है, एक जिंदा लाश उस मौत का मतलब समझने में, आस-पास के जिंदा लोगों से कई निःशब्द सवाल पूछते हुए तलाश करती है कोई आरोपी. उठाकर मेरी उंगली, उसे तुम्हारे चेहरे के सामने रखूं न तो मरनेवाला लौट आएगा, न मेरे आँसू थमेन्गे न मतलब … पढ़ना जारी रखें उस आग में क्या खोया?

आपकी अनुपस्थिति

ग्यारह महीने आप दूर रहे, क्या खोज लिया आपने अपना अस्तित्व? आप का तो पता नहीं, आपकी खोज में हमारी पहचान खो गयी। आप साल भर में घूम आए सारी दुनिया, देख आए नए रंग और नए चहरे? आपकी बेपरवा अनुपस्थिति में, हमारा रंग और फीका पड़ गया।

भगवान बनाने वाले

भगवान बनाने वाले, क्या तेरे मन में समाई? काहे को भगवान बनाया? अगर मैं आज यहाँ नही होता, तो मेरी जगह पे वह बैठा रहता । तुम लोग यह बात समझ नही पाओगे । वो मेरा दोस्त ही नही, मेरा सबसे बड़ा प्रतिद्वन्द्वी भी था । आज किसी को भगवान बना ने में तुम लोग … पढ़ना जारी रखें भगवान बनाने वाले

वो शहर…

वो शहर की भीड़ में अपना रास्ता ढूंढना वो ठेले पर सस्ते में जल्दी से नाश्ता करना वो वक्त को बचाने के लिए लोकल से लटकना वो पसीने से लथपथ धूप मे सुख रही कमीज़ वो दर्द भरे बदन की आँखों मे कल के सपने वो फिसलते हुए लमहें, उन्हे बटोरने का प्रयास वो घर … पढ़ना जारी रखें वो शहर…